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लेखनी कविता -10-Oct-2022

   🙏🏻राजगुरू,सुखदेव,भगत सिंह🙏🏻

राजगुरू सुखदेव भगत सिंह,
बांके वीर निराले थे।।
क्रान्तिकारियों की टोली में,
सच सबसे उजियाले थे।।

सन उन्नीस सौ सात सितंबर,
सत्ताइस को जन्म हुआ।।
हुष्ट-पुष्ट सुत पाकर मांँ के हृदय, असीमित हर्ष हुआ।।

विद्यावती कौर मांँ ने तो,
सुत अद्भुत ही जाया था।।
जश्न गांँव भर ने जीभर कर ,
हे !प्रिय आज मनाया था।।

पिता किशनसिंह देख पुत्र को,
मन ही मन मुस्काये थे।।
बहुत दिनों के बाद खुशी के,
दिन उनके घर आये थे।।

नाम भगतसिंह रखा पुत्र का,
पुत्र आंँख का तारा था।।
भगतसिंह का भाव त्याग मय,
हाय! सभी को प्यारा था।।

जनपद पुणे गांँव खेड़ा में,
राजगुरू अवतरित हुए।।
सन उन्नीस सौ आठ अगस्त,
चौबिस को सब उल्लसित हुए।।

पार्वती बाई के सुत ,
शिवराम पिता हरिनारायण।।
रही खुशी की रात क्षितिज में,
खिले अनोखे तारागण।।

राजगुरू भी मात-पिता को ,
सब संतति मे प्यारे थे।।
मित्र हितैषी जनों बीच सब ,
की आंँखों के तारे थे।।

गांँव गोपरा लुधियाना में ,
राम लाल थापर के घर।।
रल्ली देवी मांँ ने जन्मा,
प्रसव वेदनाएं सहकर।।

सन उन्नीस सौ सात मई पन्द्रह को जन्में हैं सुखदेव।।
ऐसे हुए अवतरित जैसे,
काल रूप हो कोई देव।।

तीनों वीर जवान हो रहे,
पढ़ लिख कर विद्वान हुए।।
आजादी के प्रति निज मनमे,
तीनों आशावान हुए।।

भारत मांँ को व्यथित देखकर,
निज मांँ का दुख भूल गए।।
विपदा का पथ चुनकर हाये,
पग-पग सहते शूल गए।।

कष्ट गुलामी के जब देखे,
रक्त स्वदेशी खौल उठा।।
इंकलाब अंतर में सोया,
जाग्रत हो कर बोल उठा।।

भारत मांँ की आजादी का,
सबने प्रण मन ठाना है।।
जनहित में अपने जीवन को,
अब तो सिर्फ लुटाना है।।

कितने अफसर मार गिराए,
आतंकित अंग्रेज हुए।।
भगतसिंह की टोली के,
हमले कुछ ऐसे तेज हुए।।

क्रान्तिवाहिनी के नायक बन,
एसेम्बली में फेंके बम।।
दिखा दिया था अंग्रेजों को,
भारतीयता में है दम।।

कुछ अपनों की ही साजिश में,
वीर बांकुरे पकड़ गए।।
कष्ट दायनी जंजीरों में,
हाय लाड़ले जकड़ गए।।

मिली सजा में मौत सभी को,
फिर भी नहीं उदास हुए।।
हंसते-हंसते शूली पर चढ़,
हाय बीर नि:स्वास हुए।।

भारतवासी तुम स्वारथ में,
चूर हुए ना करते गौर।।
जहां लगी फांँसी तीनों को,
मीत जगह वो है लाहौर।।

आओ मिलकर हम सब गाएं,
उन वीरों के गौरव गीत।।
जिभ्या अपनी राष्ट्र प्रेम से,
पावन करलें सच मनमीत।।

धन्य धरा भारत की पावन,
नाज हमें इस माटी पर
राजगुरु सुखदेव भगत सिंह,
फक्र हमें कुर्बानी पर
✍️✍️
आरती "अक्षरा"
मध्य प्रदेश 

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3 Comments

Raziya bano

11-Oct-2022 10:01 AM

Bahut khub

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Gunjan Kamal

10-Oct-2022 01:09 PM

बहुत खूब

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Nancy

10-Oct-2022 01:00 PM

Bahut sundar rachna

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